LCT-41:
कौन क्या सोचता है उसका परबाह मत करो और करो ही मत !!
क्योंकि
आप जो करते हो सही तरीके से करते हो क्योंकि आप अपनी दिल की सुनते हो।
यही आपकी अच्छा स्वभाब है ।।
LCT-42:
आपके आस पास के लोग अच्छे हैं या नहीं।
तब आप सुनिश्चित कर सकते हो
जब आप किसी समस्या में होंगे ।
अर्थात
आपकी सतर्क रहना !! आने बाले
समस्या झेलने की शक्ति है ।
आशा है उश शक्ति का सही उपयोग करते होंगे ।
LCT-43:
कौन कहता है लोग दुःख भूल जाते है ,
अपनो के साथ रहने के बाद । गलत सुने हैं आप!!
कहने के मतलब
जब अपने लोग ही दूर में रहना चाहते हैं तो सुख क्या ??
दूरी को नज़दीकी बनाओ यारोँ ।
LCT-44:
कील को शक्त प्रहार देने से पूर्ब अपने
हात को सही तरीके से पकड़ना आपके जिम्मेदारी है।
क्योंकि
कोई भी जोखिम कार्य से पूर्ब
खुद को सही तरीके से स्थापित करना आपकी जिम्मेदारी है । नहीं तो कष्ठ और बिपत्ति कभी भी जन्म ले सकता है ।
LCT-45:
धान की नसीब में लिखा रहता है कि
बह फिर से पौधा बनेगा या खाने का चावल !!
अर्थात
उसी तरह ब्यक्ति का कार्य कहता है
बह अछि रास्ते को चुनेगा या बुराई को !!
चयन आपका है !!!
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