कलंकिनी..1

सपने देखने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन सपनों को साकार करना बहुत बड़ी बात है। यह सुनकर मीनू आग बबूला हो गई। वह खुद नहीं सोच पा रही थी कि क्या करूं।

+3 विज्ञान के भौतिकी में स्नातक होने के बाद। मैं नौकरी पाने के लिए इतना बेताब था कि मैं गांव छोड़कर सीधे शहर आ गई। शहर में मौसम बहुत अलग है। जहां तक रीति-रिवाजों की बात है तो गांव में से यहां कुछ भी नहीं है। अपनी मर्जी के मालिक। गाँव में बहुत सी बातों का पालन करना पड़ता है लेकिन यहाँ सब कुछ मुफ़्त है। इस अभ्यास में मीनू ने भी खुद को बदल लिया। हां, मीनू के दिमाग में एक बात जरूर रहती है। खराब होने में देर नहीं लगती, लेकिन यहां बेहतर बनाना पड़ता है । माना जाता है कि इससे मन की कई आशाएं पूरी होंगी। शहर में बैंकिंग की कोचिंग शुरू मैं दो महीने बीत गए। सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन तीसरे महीने की शुरुआत से ही घर से फोन आने लगे। एक लड़के का प्रपोजल आया है।

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मां बोली मीनू एक बार गांव आजा। दो दिन बाद आएंगे लड़के का परिवार। मे घर नहीं आना चाहती थी लेकिन मुझे घर की याद आ गई और मां बोले की बेटे को देखकर तू मना कर देना और चले जाना । क्योंकि आईबीपीएस की परीक्षा 10 दिन बाद होना है ।

जब मैं घर पहुंचा तो मैंने दौड़ कर अपनी मां को गले लगाया। एक दो बूंद आंसू गिरे।  पिताजी ने मेरे माथे पर हाथ रख कर आशीर्वाद दिए और उनके बगल में बैठ गया। पिताजी ने कहा, लड़की, तुम अब और मत जाओ। “लड़की को पढ़ने के लिए छोड़ दिए और फिर से उदास होना ठीक नहीं ।” पिताजी ने कहा, तुम अच्छी तरह पढ़ रहे हो ना? सात दिन के बाद परीक्षा है । जब लड़के के घर वाले देखने के बाद मैं नहीं रुकूंगा। पापा ने कहा हाँ ठीक है।

परिवार के साथ बेटा भी आता है। बेटा का नाम राकेश, थोड़ा सांवला चेहरा । डाक्टर की पढ़ाई के बाद डॉक्टर के पास रहकर अभी ट्रेनिंग ले रहा है । मीनू का दिमाग सिर्फ अपने परीक्षा पर थी । लड़के के घरवालों ने मीनू को देखा और उसे पसंद भी किए और यह कहकर चला गए कि हम यह संपर्क को रिश्तेदारी में बदलना चाहते हैं । मीनू की टेंशन बढ़ गई। जैसे ही उसने इस बारे में सोचा, उसके सारे question डिलीट होते जा रही थी ।

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एग्जाम दिया लेकिन सब बेकार। मीनू का गुस्सा अपने पापा और मां के ऊपर बढ़ गया। परीक्षा के बाद पिता ने फोन पे पूछा। तेरी परीक्षा कैसे हुई? मीनू ने गुस्से में फोन काट दिया। फोन फिर बजने लगा । इस बार माँ बोली। मीनू रोने लगी। उसने गुस्से में कहा, “मेरी परीक्षा खराब थी और तुम दोनो की बजह से मेरा एग्जाम खराब हुआ।” मेरे दिन तनाव में गुजरे। आपने कहा था एक बार आकर देख कर चले जाओ, और अभी प्रपोजल तय भी कर दिया और उस दिन तुमने क्या कहा? तुझे देख कर जाने के बाद हम बाद में मना कर देंगे

  मां बोली हमे नाराज़ क्यों हो रहे हैं?? अच्छे घर और बेटा डॉक्टर है क्या दिक्कत है? डॉक्टर या कंपाउंडर, आप जानते हैं कि वह एक डॉक्टर है या नहीं है वह अभी काम सीख रहा है। फोन रख दो, मैं तुमसे बात नहीं करूंगा। फोन काटो।

दो दिन बाद फोन आया। मीनू क्लास में थी और बोली, मैं क्लास में हूं और हम बाद में बात करेंगे । तब मां ने कहा, तुम्हारे पिता का तबियत खराब हो गया है, उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही है।

मीनू बोली में अभी निकलता हूं। मीनू ने बस पकड़ी और सर की इजाजत लेकर गांव पहुंच गई। मीनू अपने पिता को देखकर दुःखी हो गई। चेहरे पर ऑक्सीजन मास्क लगाए हुए थे । मीनू पिता के पास पहुंचा, मीनू को देखकर पिता के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गई। मीनू ने कहा क्या हुआ पापा आपको?? पिता ने कहा, “मैं बाहर से आया था, अचानक अँधेरा दिखने लगा, अचानक पैर फिसला और नीचे गिर गया। काफी बूढ़ा हो गया हूं । मन में डर सत्ता रहा है कहीं आपकी नौकरी और आपकी आगे बढ़ने की सोच कहीं आधी तो नहीं रह जाएगी।

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मीनू की आंखों में आंसू आ गए। उसने कहा कि आपको कुछ नहीं होगा पापा, तुम ठीक हो जाओगे। शाम को सात बजे इलाज के लिए सुरेश बाबू आए। मीनू ने उसे प्रणाम किया। अपने पिता को कुछ दवा दी और बाहर आ गए। मीनू भी पीछे पीछे आई। उसने पूछा पापा को क्या हुआ? सुरेश बाबू ने कहा। उसे सिर और सीने में चोटें लगी हैं। मैंने अपनी ओर से दवा दे दी है लेकिन मेरी राय यह है की उसे शहर में अच्छी अस्पताल से इलाज करवाओ। कोई अच्छा इलाज हो सकता है।

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Part-2

नीलमाधब भुयां (लेखक)

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