Lifestyle Changing Thoughts in Hindi Part-02

Lifestyle_Changing_Thoughts_in_Hindi_Part_02

Lifestyle_Changing_Thoughts_in_Hindi_Part_02
Lifestyle Changing Thoughts in Hindi Part-02



LCT-16:

जिंदगी मेट्रो की तरह हो गया है
कब कौनसा मेट्रो आएगा यकीन करना मुश्किल है??
समय देखो, खाली या भीड़ को देखकर सफर करो  ।
अथार्त

जीबन में हरवक्त अच्छा समय आएगा ये कोई नहीं बता सकता ।
इशलिये अपनी दिमाग को ज्यादा जोर दे कर तनाब नहीं लेना !!
आने बाले पल जैसा होगा उसी हिसाब से कार्य कीजिये एबं उसका आनंद लीजिये ।



LCT-17:
इच्छा आपकी हो या उनकी,
जो भी कार्य होता है उनकी मर्जी से,
कर्म और प्रेम सब उनकी लीला है,
फल और अन्न उनके चरण के प्रसाद है।
अथार्त
भक्ति और मन की शांति से जीती जाती है उनकी कृपा,
ना कि मंदिर में दान और बड़े मात्रा की भोग,
अपनी अहंकार को त्याग कर के मन से पुकारना असली पूजा है ।।



LCT-18:
घर मे प्रबेश से पहले हम दरबाजा के पास पड़ी चटाई में अछि तरह पेर को साफ करके प्रबेश करते हैं । जिस से संतुष्टि होते हैं कि मेरे द्वारा अनाधिकृत शक्ति या गंदगी घर मे प्रबेश नहीं हुआ है।

अथार्त

जीबन में कोई भी कार्य का पहला कदम सोच समझ कर बढाइये । दुष्ट चरित्रबान लोगो की बातो को अनदेखा करें और तनाब रहित कार्य करिए फलस्वरूप मन मे संतुष्टि उत्पर्ण होगा ।



LCT-19:
सम्मान उनको दीजिये जो आपके उपर निगाह और घर पहुंचने तक चिंतित रहते हैं, बजह यह की आप उनके करीब रहें ।

अथार्त

हर एक मनुष्य की कोई ना कोई सुभचिंतक होते हैं ।
सुभचिंतक के अलाबा बाकी सब स्वार्थरूपी मनुष्य है ।
सुभचिंतक की सेवा और उनकी ध्यान रखना आपकी प्रथम कर्तब्य होना चाहिए ।




LCT-20:

भाई, बहन, माता और पिता में परिबार अपूर्ण रहता है ।
समय के साथ परिबार में सदस्यता की बृद्धि होती है।
तत्पश्चात मन मे लोभ जन्म लेकर “मेरा” शब्द का उत्पर्ति होता है ।

अथार्त

सदस्य पांच हो या दस जब लोभ का त्याग करेंगे तब परिबर्तन आ सकता है । “मेरा” के बदले “हमारा एक अच्छा परिबार” का पुनः निर्मित होगा, और आप एक पबित्र परिबार का सदस्य बन सकते हैं ।।


Follow my blog and visit daily for new contents.

Pages:-

Part-01<<<<>>>>>>Part-03

Follow me:- 


 Click here for instagram page    :  Instagram





Thanks…….



2 thoughts on “Lifestyle Changing Thoughts in Hindi Part-02”

Put your Valuable feedback