तिरंगे की शान जब ऊँचाइयों को छूती है,
हौसलों का सीना गर्व से तब झूम उठती है।
गणतंत्र का यह पावन दिवस
कहे हर बार,
आपदा में जो खड़े रहें,
वही सच्चे आधार।
NDRF के जवान आँधी में दीपक,
उजालों की पहचान,
तौकते हो या यास की तूफ़ान
हमेशा अडिग रही इनकी शान।
हिमाचल की क्लाउड बर्स्ट हो
या वायनाड की लैंडस्लाइड
चाहे बिहार–चेन्नई की बाढ़ ही क्यों न हो,
आपदा मोचन बल हर दम रहता है टाइट।
मंदौस, मिचौंग, फेंगल चक्रवात का
कहर जब छाया,
मोचन बल के साहस ने
कई जीवन लौटाया।
बालासोर की रेल दुर्घटना में,
लोहे के ढेर तले जब उम्मीदे
दम तोड़ रही थी,
NDRF की त्वरित कार्रवाई
नई ज़िंदगी जोड़ रही थी।
NDRF की चौथी वाहिनी का गौरव अपार,
दक्षिण की हर आपदा में सदा रही तैयार।
अनजान धरती पर जब NDRF आगे बढ़ी,
SDRF दीप बनकर, संकट की राह गढ़ी।
मौन के सच्चे सिपाही, हर मोड़ पर तैयार,
प्रशीक्षित K9 टीम, जिनकी सूँघ बने
जीवन की उम्मीद अपार।
एक इशारा,,, एक भौंक,,,
मौत के साये से लौट आता है
कई जीवन-संसार।।
भारत की सीमाओं से आगे भी
मोचन बल ने रचा इतिहास,
तुर्किये, म्यांमार, श्रीलंका तक
लहराया मानवता का विश्वास।
ना यश की चाह,
ना प्रशंसा की आस,हर सुरक्षित साँस के लिए
उनका हरदम रहा प्रयास।
आज गणतंत्र के इस पावन पर्व पर
आपदा मोचन बल के,
सभी वीर जवान को मेरा नमन ।।
जय हिंद… जय भारत…
निलमाधब भूयां

