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Eng(5) Shimla, Kullu and Manali

The Tour of Shimla, Kullu and Manali.
Fifth/Last day
We woke up early in the morning because we had planned to visit the apple garden near the hotel. We spend more time in the apple garden. After roaming the garden we check out the hotel and start the tour towards the Bashisht Banu temple. There was a hot water spot nearby. There is a waterfall some distance away from the place where some people returned but after knowing its distance, we came back from halfway. Buy some goods from there and then we spend a lot of time on the banks of Beas river on the way. At 03 PM went to Mall Road to spend some time with enjoyed the light sunshine. In the evening, 4 o’clock arrived at the Bus Stand for Volvo Bus. we had got 31,32 Volvo Bus tickets. The bus ticket was already booked by the ITO agency. we gave thanks to ITO representative Babita Sharma and gave feedback for the entire tour. There was a doubt in my mind not to vomit during the tour. The conductor had given us polyethylene. If vomiting occurs, the Bus should not be dirty. Volvo was also given water bottles with blankets. We both slept in the evening for fear of vomiting and we did not eat anything at night when the car stopped for Dinner. We slept around 10-11 hours on that day.
The entire Arrangement of the Tour was done by ITO agencies. Tour was very good and awesome. There was a complaint against the driver, we speaking daily for car cleaning. But in the 5-day journey, he cleaned his car only on the last day, after repeated complaints. We gave many many thanks to Miss Babita Sharma after the tour. she had supported us everywhere and I noticed one thing in Miss Babita Sharma. Whenever I used to call she would laugh and say “yes”, she never refused any request of us with never angry and show the way to the solution. One thing my Wife said that time “when our children plan to hang out after marriage, they will contact a representative like Babita Sharma and send them to the Tour”.

How did you like our tour? So friends please give the feedback on the above tour. If you are thinking to go to Shimla and Kullu Manali so call the ITO representative Miss Babita Sharma.

India Travels online Information

Email.

babitasharma.ito@gmail.com (Babita Sharma)
indiatravelsonline@gmail.com(Official Email)
Some of Fifth day Tour Photos:-
The Tour of Shimla, Kullu and Manali (5th Day)
plucking apple
The Tour of Shimla, Kullu and Manali (5th Day)
Beas river
The Tour of Shimla, Kullu and Manali (5th Day)
Meditation at Beas river
The Tour of Shimla, Kullu and Manali (5th Day)
style
running at the bank of the river
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The_Tour_of_Shimla,_Kullu_and_Manali_5th_day

अतीत के तीन दिन ( Past Three days of my life)

दिनांक 23 मार्च 2013 को दोपहर 02 बजह खाना खा कर थोड़ी देर बिश्राम करने केलिए अपने बिस्तर पर गया । मन ठीक नहीं लग रहा था । Movie देखने केलिए मोबाइल निकाला जिसको आधा देख चुका था और आधा movie बाकी था और बह मुम्बई Terrorist अटैक पर फिल्माया गया था । मूवी का नाम “The Attack of 26/11″ । मूवी खतम होने के बाद मुझे कुछ अलग सा अनुभब हुआ और मूवी के अंदर भी दर्दनाक मौत देखकर बहुत दुखी हो रहा था । मूवी को बंद करके दूसरे मोबाइल की और देखा और उसमें 30 Missed Calls थे ओर वो slow sound होने पर मुझे सुनाई नहीं दिया था । उसमे कुछ मेरे सारे दोस्त और कुछ चचेरे भाई ने कॉल किये थे । में घबरा गया और सोचने लगा कुछ बुरा तो नहीं हुआ है। उसमे मेरा दोस्त अक्षय का कॉल आया था जो मेरे गांव का दोस्त है उसको कॉल लगाया। में कुछ पूछने से पहले वो पूछने लगा ” कैसा है तू ? ” में बोला ठीक हूँ । फिर वो पूछा कि कुछ खबर सुना है क्या ? मैंने बोला नहीं तो !!! मेंने कुछ नहीं सुना और क्या हुआ है ? मेने पूछा ?? तो अक्षय ने बोला कि तुम्हारा जीजा जी का एक्सीडेंट हुआ है !!! में घबरा कर पूछा कब ? और कैसे हुआ ? और कहां हुआ है ? तो उसने बोला में भी अभी अभी सुना हूँ कि आपके जीजा जी और सुरेश भाई मिलकर भंजनगर गाड़ी खरीदने गए थे वहां एक्सीडेंट हुआ है । मुझे इतना ही खबर मिला है बाकी हम निकल रहे है उनको देखने केलिए बहां पहुंचकर बाकी का खबर बताता हूँ । इतना बोलकर बो फ़ोन काट दिया। ये बात सुनकर मेरे पैरों के नीचे जमीन खिसक गई । असली एक्सीडेंट क्या हुआ है ये पता नहीं था ? इसलिए में मेरे पापा को फ़ोन किया । पापा फ़ोन उठाये परंतु वो भी रो रहे थे और बाइक चलाकर एक्सीडेंट कि जगह पर जा रहे थे । मेरा तनाब बढ़ता जा रहा था । उसके तुरंत बाद मेरा और एक दोस्त सागर फ़ोन किया और बोला कि आपको पता है कि नहीं एक्सीडेंट के बारे में? तबतक मेरे आंखों में आशु गए थे । में पूछा क्या हुआ बताओ यार ? कोई मुझे ठीक से नहीं बता रहा है । सागर बोला घबराओ मत ! में सब कुछ बताता हूँ , क्या हुआ है ? क्योंकि मेरा छोटा भाई तपन वहां मौजूद था वो मुझे सब कुछ बोला है । पहले पहले वो आपके जीजू को नहीं पहचान पाया परंतु बाद में उसको पता चल गया और मुझे घटना के बारे में सब कुछ बताया। सागर बोला समय करीब 12.30 बजह आपकी जीजू और आपके गांब के और एक भैया भंजनगर आये थे और साई मंदिर से 200 मीटर की दूरी पर रोड के किनारे पेड़ के नीचे मोबाइल से बात कर रहे थे । एक ट्रक जो कि हाईवे पर जा रहा था अचानक ट्रक की बेरिंग टूटने के कारण ड्राइवर गाड़ी को काबू में नहीं कर पाया और उन दोनों के ऊपर ट्रक चढ़ा गया । मौके पर आपकी जीजा जी की मौत हो गई है और साथ मे जो भैया थे उनको गंभीर हालत में मेडिकल में भर्ती कराया गया है और डॉक्टर भी बोल रहे है उनके सिर पर चोट लगी है वो भी नहीं बचेंगे । यह बात सुनकर जैसे मुझे बहुत जोर से बिजली की झटका लगा और चारपाई के बगल में कैसे गिरा मुझे पता नहीं चला । कुछ समय केलिय में सुन्न हो गया और मेरे हात पेर काम नहीं कर रहे थे। फ़ोन पे हेलो हेलो की आवाज़ आ रहा था और मुझे बुलाने की आवाज़ भी आ रहा था । मुझे उसकी आवाज़ तो सुनाई दे रहा था मगर मेरे जुवान से एक भी लब्ज़ नहीं निकल रहा था !! कुछ मिनट तक मुझे ऐसे लगा कि जैसे मेरे शरीर में जान ही नहीं है । करीब 2 मिनट के बाद में उसकी आवाज़ का उत्तर दिया । सागर बोला कि अपने आप पे कंट्रोल रखो और शांति दिमाग से काम करो , इतना सुनकर में फ़ोन रख दिया। बात खत्म हुआ और मेंरा रोना सुरु हो गया मेरा रोने की आवाज़ सुनकर रूम में बाकी दोस्त सो रहे थे वो भी उठ कर मेरे पास आकर मुझे पूछने लगा ? में रोते रोते सब कुछ बोला और बो मुझे समझाये । समय करीब 3.00 बज चुका था । अपने आप को संभालते हुए मेरे यूनिट कमांडर को कॉल करके सारी बाते बोलने लगा । मेरे यूनिट कमांडर श्री बिधान भंडारी थे वो बहुत अच्छे आदमी थे मेरे बातों को सुनकर वो तुरंत बोले कि आप छूटी की दरखास्त भर कर गांब केलिए निकल जाओ । मेरे दिमाग काम नहीं कर रहा था । मेरे ऊपर ऑफिसर श्री चितरंजन और साथ मे प्रविण कुमार और लिजू साहब को भी बताया । सब लोग मुझे मदद किये मुझे यूनिट से तुरंत गाड़ी दिया गया और में एयरपोर्ट केलिए निकल गया । समय 3.30 हो चुका था। अगर मुझे by Road जाना है तो चार दिन लगेगा घर पहुंचने मे । उस दिन मौसम खराप होने के कारण evening फ्लाइट को रद्द किया गया था । में बापस यूनिट में आया मगर मुझे कहीं मन नहीं लग रहा था । उशी रात में जैसे एक पत्थर बन गया था । खाना भी ठीक से नहीं खाया । एक पल केलिए नींद नहीं आया मेरे आंखों में सिर्फ बहन की याद आ रही थी की बो किस हालात में होगी। जीजा जी की बात याद करके रो रहा था । रात कैसे निकल गया पता नहीं चला ।
24 तारीख सुबह एयरपोर्ट तक यूनिट से मुझे गाड़ी दिया गया । 07 बजह फ्लाइट लेकर में दिल्ली केलिए रबाना हुआ और मुझे आगे हैदराबाद जा कर फिर विजयवाड़ा में उतरना है । क्योंकि मुझे Direct भुबनेस्वर तक फ्लाइट नहीं मिला और में जब भी में घर जाता था भुबनेस्वर हो कर उतरके घर जाता था । मगर मेरा नसीब में भुबनेस्वर वाला फ्लाइट नहीं था । 3 फ्लाइट में सफर करके शाम को 3.30 बजह विजयवाड़ा में उतरा। एयरपोर्ट से मैन हाइवे दूर में था 1 किलोमीटर से ज्यादा था । एक कार बाले को लिफ्ट मांगा मगर वो मुझे ऐसे देखा जैसे में लिफ्ट नहीं उसका किडनी मांग रही हूँ । सुबह से कुछ नहीं खाया था । मुझे भूक तो लग रहा था मगर खाने की इच्छा नहीं था । वहां से पैदल हाईवे तक पहुंच गया और में पहले से ही एयरपोर्ट में सिक्योरिटी से पूछ लिया था रेलवे स्टेशन कैसे जाना है और वो मुझे बता दिए थे । फिर भी में सही दिशा जा रहा हूँ या गलत दिशा की और जा रहा हूँ Confirm करने केलिए बहां के एक आदमी को पूछा । वो आदमी मुझे बिना जवाब दिए चला गया । विजयवाड़ा में हर जगह तेलुगु बोलते हैं मगर मुझे तेलुगु नहीं आता था । में इंग्लिश एबं हिंदी में पूछ रहा था । 25-30 मिनिट के बाद एक सिटी बस आया और बस कंडक्टर को पूछा क्या ये बस रैलबे स्टेशन को जा रहा है क्या ? कंडक्टर मेरी language को समझ गया और बोला “Yes !! Yes !! come in” । रेलवे स्टेशन पहुंच कर पता लगाया कि ब्रह्मपुर केलिए रात को 08 बजह ट्रैन है । टिकट केलिए काउंटर के पास देखा तो वो बंद हो चुका था । तो में General टिकट ले लिया । दो दिन से कुछ खाना नहीं खाया था इसलिए कुछ खाने केलिए स्टेशन से दूर एक होटल में गया। उश होटल की गंदगी देख कर मुझे उल्टी आ रहा था । फिर भी अनदेखा करके खाना खा लिया और स्टेशन में इंतज़ार किया । मगर तबियत ठीक ना रहने के कारण जो भी कुछ खाना खाया था कुछ देर के बाद सब उल्टी हो गया । अभी फिर से पेट खाली हो गया । ट्रैन आने का समय हो चुका था इसलिए कुछ भी नहीं खाया और ट्रेन के sleeper डिब्बे में चढ़ गया । ट्रैन में बहुत भीड़ थी मगर कुछ स्टेशन के बाद लोग उतर गए । TTE ने मेरा टिकट चेक किया और बोला की आप General डिब्बे में जाओ तो में उनको request किया कि मेरा तबियत ठीक नहीं है और में इमरजेंसी छूटी जा रहा हूँ अगर किसी जगह सीट हो सकता है तो adjust कर दीजिए । TTE मेरे चेहरे को देखकर थोड़ा मुस्कुराया और बोला रुको में उधर से देख कर आता हूँ । कुछ देर के बाद TTE बापस आया मुझे बोला कोई सीट नहीं है ऐसे ही आप adjust करलो । में TTE sir को Thank you बोला । रात को 10 बजह एक नमकीन बेचने बाला आया और एक Kurkure की पैकेट लिया और उश रात की खाना उतना ही था । 12 बजह सब सोने जा रहे थे, स्लीपर की शटर उठाकर सब लोग सोने लगे और जिसके सीट में बैठा था वो भी मुझे वहाँ से जाने केलिए कहा । ऐसे ब्याबहार किया जैसे की में एक चोर हूँ । में कुछ नहीं बोला वहां से उठकर लैट्रिन के पास आ कर खड़ा हो गया । मेरा एक ही हैंड बैग था। उसे सीट के नीचे रखा था । मगर वो आदमी मुझे बोला कि ये बैग किसका है यहां से ले जाओ नहीं तो फेक दूंगा। गुस्सा तो आ रहा था फिर भी शांत दिमाग से पूछा भैया जगह तो ज्यादा है ! इसमें क्या परिसानी है ?? । वो बोला आप उठाओ अपना बैग और अपने साथ रखो यहां हमारा बैग रहेगा, इधर उधर हो सकता है। इतना सुनकर में बोलने लगा आप अपना बैग को चैन से लॉक किये हो फिर भी कोई ले जाएगा । इतना बोलने के बाद वो आदमी गुस्से हो कर बोला आप यहां से जाओ !!! में ऐसे ही दुखी था ,सोचा एक रात गुजारना है फिर सुबह बरहमपुर पहुंच जाऊंगा । किस लिए उसके मुहं लगूं? ये सब घटना ऊपर सीट में बैठा एक 17 साल का लड़का देख और वो अपने परिबार के साथ सफर कर रहा था । वो मुझे वोला भैया आप ऊपर आ जाइये और हम दोनों बैठ जाएंगे । मुझे लगा कि चलो कोई तो मेरा दुखी मन को महसूस किया । में ऊपर आया और एक ही सीट पे दोनों adjust करके बैठ गए । कुछ देर मेरे साथ बात करने के बाद उस लड़के को पता चला कि में फ़ोर्स में हूँ । और बो बहुत खुश हो गया और पूछा ” भैया मुझे फ़ोर्स वाले लोग बहुत पसंद है ” वो बोला मेरा इच्छा था कि किसी फ़ोर्स बाले आदमी से में बात करूँ और उनके साथ हाथ मिलाऊं। इतना बोलकर हाथ बढ़ाया और उसके साथ हाथ मिलाया । वो मुझे अनुरोध किया कि भैया में आप की ID Card देख सकता हूँ क्या ? में बोला ! हाँ जरूर देख सकते हो । अपना ID card दिखाया और देखते देखते कहा कि भैया मेरा भी एक सपना है कि ऐसे परिचय पत्र मेरे नाम का हो ?? मेने बोला कोशिस करो जरूर सफल हो जाओगे । मेहनत करो और दौड ते रहना, जो भी भर्ती निकलता है उसको आबेदन करो । कुछ देर बात करने के बाद हम सो गए ।
सुबह 5.30 बजह नींद टूटा और देखा मेरा स्टेशन आने वाला था अपना सामान लेकर में नीचे आ गया । बो लड़का दुखी हो कर पूछा आपका स्टेशन आ गया क्या ? मेने जबाब दिया , आधा घंटे में पहुंच जायेगा । 6.15 में बरहमपुर रेलबे स्टेशन में उतरा । वो लड़का थोड़ा दुःखी होते हुए मुझे Bye कहा । बस स्टैंड पे आया । वहां से बुगुड़ा यानी मेरे घर के नजदीकी बस स्टॉप तक गाड़ी जाता है । बस में बैठा और रास्ते मे असिका नाम का एक जगह है । बहां गाड़ी कुछ देर तक रुकता है और फिर आगे केलिए निकलता है । बहां जब गाड़ी आगे केलिए निकला तब खिड़की से बाहर देखा कि मेरा ऊपर बाले भैया रोड के ऊपर खड़े होकर गाड़ी का इंतज़ार कर रहे थे । बो North East जोन में फ़ोर्स की नौकरी करते है । भैया भी 24 तारीख को निकले थे । में गाड़ी के अंदर से ही आवाज़ लगाया और भैया आये और हम दोनों बुगुड़ा के लिए निकल पड़े । भैया भी उसी दिन सुबह सुबह ट्रैन से उतरकर बरहमपुर से असिका तक आएं और उनको आगे केलिए गाड़ी नहीं मिल रही थी ।
3 घंटे के बाद बुगुड़ा बस स्टॉप आने बाला था । हम दोनों पहले से ही उतर गए क्यों कि हमारे गांब जाने केलिए रास्ता पहले आता है । हम पैदल 300 मीटर तक चलने के बाद हमारे गांब के एक ऑटो बाला भैया हम दोनों को देखे और वो हमको गाड़ी में बिठाए । उसी दौरान मेरे पापा भी बाइक लेकर पहुंच गए। बाइक में दोनों केलिए जगह नहीं था इसलिए हम ऑटो में बैठ कर घर तक आये ।
2 दिन बीत चुका था यानी कि 25 तारीख को में गांब में पहुंचा । दोपहर 2 बजह करीब हम तीनो मेरे बहन की गांब केलिए निकल पड़े ,मेरे घर से वो गांब 10 किलोमीटर की दूरी पर है । गांब का बाताबरण बिल्कुल शांत हो पड़ा था । उशी शांत बाताबरण कह रहा था कि कोई अनमोल चीज़ खो दिया है । सबके मन मे जीजा जी की जाने की दुःख था । क्यों कि जीजा जी हसमुख स्वभाब के आदमी थे और बो दूसरे को सहायता करने केलिए पहले कदम रखते थे। लोगों के आंख में आँसू और घर के बाहर बैठे लोगों ने हम को देख कर फिर से रोने लगे । उनको समझाके हम घर के अंदर आये । घर के एक कोने में मेरी बहन बैठी थी और साथ मे घर की महिलाएं भी बैठे थे । उसी बक्त उसके लिये कुछ खाने केलिए दिया गया था परंतु बह मना कर रही थी। अचानक मेरी बहन की नजर मेरे ऊपर पड़ी मुझे जब देखा तो वो मुझे गले लगाके फिर से रोना शूरू कर दिया। उसकी रोना देख कर मुझे भी रोना आया और में भी बहुत रोया । दो दिन से कुछ नहीं खायी थी। उसको समझाकर खाना खिलाया । और बाकी जो काम था उसमें मदद किये तथा 12 दिन तक जो भी कर्म होता था उसमें मदद करके आखरी में बहन को अपने गांब लेके आ गए थे । अभी दोनों बच्चे की पढ़ाई केलिए वो बुगुड़ा में रहते हैं।
याद करता हूँ वो तीन दिन मेरे लिए दुख और कष्ठ जनक दीन था और बहन की दुख कभी खत्म नहीं होगी ये सोच कर कभी कभी तो बहुत दुःखी हो जाता हूँ ।
कहानी तो कभी खतम नहीं होगी इसलिए कहानी को आगे ना लेकर यहां समाप्त करता हूँ । अच्छा लगे या कोई भी बात पूछना चाहते है तो पूछ सकते है । मेरा या सच्ची कहानी आपको पसंद आया है तो सबको ये लिंक शेयर कीजिये ।
ऐसे ही पढ़ते रहिये और आगे भी बहुत ब्लाग अपलोड करूँगा मेरे साथ रहिये ।
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धन्यबाद ।।