सच्चे मित्र

एक गांव में दो दोस्त रहते थे। वे बहुत घनिष्ठ मित्र थे। एक आकाश और दूसरा राजा। जो एक दिन भी किसी को देखे बिना नहीं रह पाता। वे रोज एक साथ स्कूल जाते हैं, साथ बैठते हैं और साथ में खेलते हैं। राजा बुराई करता है, लेकिन आकाश हमेशा उससे कहता है, “राजा ऐसा नहीं करते,” और आकाश हमेशा उसे मना करता है। राजा कभी आकाश की नहीं सुनता और राजा किसी भी मुसीबत में आकाश की मदद नहीं करता। आकाश बहुत साहसी था।

पाँचवीं कक्षा की वार्षिक परीक्षा के बाद, गर्मी की छुट्टी पर एक साथ मिलते हैं। आकाश पानी में तैर नहीं सकता लेकिन राजा हमेशा कहता है कि अरे डरो मत पानी में आओ मैं तुम्हें सिखाऊंगा। आकाश सोचता है यदि वह मुझे बिना सिखाए पानी के बीच में छोड़ दे तो मैं डूब जाऊंगी, वह इस बात से डरता था। एक दिन राजा की बात मान ली और आकाश के साथ जल में चला गया। राजा ने पहले तो उसका हाथ पकड़कर समझाया लेकिन फिर उसे गहरे पानी में छोड़ दिया। आकाश के पैर जमीन में नहीं लग रहा था । राजा तालाब के किनारे आया, कपड़े बदले और घर जाने के लिए निकल पड़ा। आकाश चिल्ला रहा था, मुझे बचाओ, मुझे बचाओ, लेकिन राजा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और घर की ओर चल दिया। कुछ देर बाद आकाश बहुत पानी पिया भरसक प्रयास करने के बाद वह तालाब के किनारे पर पहुंचा। आकाश राजा से नाराज नहीं हुआ और न ही किसी को इसके लिए कहा। कुछ दिन बीत गए। कुछ दिनों बाद रविवार आया। राजा ने कहा, “चलो, जंगल के पास एक जाम का पेड़ है। बहां चले और बहुत सारे जाम खायेंगे।” आकाश के मना करने के बावजूद राजा उसे घसीट कर ले गया। धूप तेज होने पर सभी घर में हैं। दोनों जंगल के पास जाम के पेड़ के पास पहुंचे। जाम है लेकिन बहुत ज्यादा है। कुछ जमीन पर गिर था और उसने उन्हें इकट्ठा किया और खा लिया, लेकिन वह और खाना चाहता था। राजा ने पास में कुछ पत्थर पड़े देखे, उसने पत्थरों को उठाया और पेड़ की और फेंकने लगा । इस समय राजा जिन पत्थरों को मारता है वे पास की झाड़ियों में गिरता था तो कभी-कभी जंगल में चले जाते हैं। कुछ देर बाद उनका शोर और पत्थर गिरने की आवाज सुनकर दो भेड़िये आ गए। भेड़िये को देखकर दोनों डर गए, दोनों जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। भेड़िये भी उसका पीछा करने लगे। कुछ ही दूर जाने के बाद राजा एक पत्थर से टकराकर गिर पड़ा, जिससे उसका सिर टकरा गया और मूर्छित हो गया। जो राजा आकाश के सामने दौड़ रहा था। अचानक राजा के मुंह से कोई आवाज न सुनकर उसने पीछे मुड़कर देखा तो राजा बहुत दूर था और भेड़ियों ने उसे घेर लिया और राजा के पैर और हाथ काट रहे थे। यह देखकर आकाश बहुत डर गया, वह दौड़ने के लिए निकला पर भाग नहीं सका। एक तरफ है भेडि़ए का खौफ और दूसरी तरफ है राजा की जिंदगी। उसने निश्चय किया कि मैं राजा के प्राण बचाऊँ परन्तु उसके मन में बहुत भय था। आकाश ने हिम्मत जुटाई और चिल्लाते हुए भेड़ियों की ओर दौड़ा, पास के पत्थरों को उठाकर फेंकने लगा। तब तक भेड़िये नहीं जा रहे थे, लेकिन पत्थर फेंकने के बाद भेड़िये डर के मारे निकल गए। आकाश राजा को उठाने लगा। कुछ ही मिनटों के बाद राजा होश में आया और भेड़िए को शब्द याद आए और वह डरने लगा। आकाश ने कहा कि भेड़िये चले गए हैं। राजा ने आकाश से पूछा कि जब तुम आगे दौड़ रहे थे तो तुमने मुझे कैसे देखा। आकाश ने कहा कि तुम्हारे बेहोश होने के बाद भेड़िये तुम्हें काटने लगे। मैं डर गया था लेकिन मैं तुम्हारे जीवन के लिए वापस आ गया क्योंकि तुम मेरे सबसे अच्छे दोस्त हो। यह सुनकर राजा ने आकाश से पूछा, तुम मेरे सच्चे मित्र हो। राजा ने कहा कि तुम चाहते तो मुझे छोड़ सकते थे और आज तुम्हारे लिए मेरी जान बच गई। फिर वे दोनों गांव आ गए, राजा के पिता ने यह सुनकर आकाश को धन्यवाद दिया और राजा ने दवा और इंजेक्शन लिया और कुछ दिनों के बाद वह ठीक हो गया। बाद में दोनों परिवारों के बीच संबंध काफी घनिष्ठ हो गए। राजा कभी भी आकाश को अकेला नहीं छोड़ता था । हर समय साथ रहते थे। उन्होंने हमेशा एक दूसरे की मदद की।

इस कहानी से क्या सीखा जा सकता है ??

  1. किसी के साथ गलत नहीं करना है ।
  2. मुसीबत के समय हमेशा मदद करनी चाहिए।
  3. किसी के प्रति बुरा भाव न रखें।

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